(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.12. अध्यायः 012
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
जनमेजयसर्पसन्नप्रस्तावः॥ 1 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

रुरुरुवाच। 1-12-0x(56)(1069)
कथं हिंसितवान्सर्पान्स राजा जनमेजयः।
सर्पा वा हिंसितास्तत्र किमर्थं द्विजसत्तम॥ 1-12-1(1070)
किमर्थं मोक्षिताश्चैव पन्नगास्तेन धीमता।
आस्तीकेन द्विजश्रेष्ठ श्रोतुमिच्छाम्यशेषतः॥ 1-12-2(1071)
ऋषिरुवाच। 1-12-3x(57)
श्रोष्यसि त्वं रुरो सर्वमास्तीकचरितं महत्।
ब्राह्मणानां कथयतां त्वरावान्गमने ह्यहम्॥ 1-12-3(1072)
सौतिरुवाच। 1-12-4x(58)
`इत्युक्त्वान्तर्हिते योगात्तस्मिन्नृषिवरे प्रभौ।
संभ्रमाविष्टहृदयो रुरुर्मेने तदद्भुतम्॥' 1-12-4(1073)
बलं परममास्थाय पर्यधावत्समन्ततः।
तमृषिं नष्टमन्विच्छन्संश्रान्तो न्यपतद्भुवि॥ 1-12-5(1074)
स मोहे परमं गत्वा नष्टसंज्ञ इवाभवत्।
तदृषेर्वचनं तथ्यं चिन्तयानः पुनःपुनः॥ 1-12-6(1075)
लब्धसंज्ञो रुरुश्चायात्तदाचख्यौ पितुस्तदा।
`पित्रे तु सर्वमाख्याय डुण्डुभस्य वचोऽर्थवत्॥ 1-12-7(1076)
अपृच्छत्पितरं भूयः सोस्तीकस्य वचस्तदा।
आख्यापयत्तदाऽऽख्यानं डुण्डुभेनाथ कीर्तितम्॥ 1-12-8(1077)
तत्कीर्त्यमानं भगवञ्श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः।'
पिता चास्य तदाख्यानं पृष्टः सर्वं न्यवेदयत्॥ ॥ 1-12-9(1078)

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि द्वादशोऽध्यायः॥ 12 ॥

॥ समाप्तं पौलोमपर्व ॥

Mahabharata - Adi Parva - Chapter Footnotes
1-12-5 नष्टं अन्तर्हितं॥ द्वादशोऽध्यायः॥ 12 ॥


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